Sunday, April 19, 2009

क्यों न आबे चैन




क्यों न आबे चैन , बन गया ये प्रीत वाली रैन


धरकन में बस गया तू , जिया ले गया तू


अब न आबे मुझे चैन , निगोरा बीत न पाए ये रैन


क्यों तो मुझसे आँख लडाई , पहले तो थी एक दम परायी


बन न जन तुम हरजाई ।


खाई है जो कसम , साथ निभाना


प्यार का वादा भूल न जाना


पिया वादा तो मरते दम तक है निभाना


लेकिन आप प्यार का वादा भूल न जाना


अब तो एक पल जुदा होकर जी नहीं पाउँगा


कसम जो खायी है तो आपका होकर रहूँगा


प्यार में सारी दुनिया का गम सहूंगा ।


उफ़ तक नहीं करूँगा


तुम पर तो मुझे है यकीं , मोहब्बत से बड़ी कोई नहीं ज़मी


तू बन जायेगी नदियाँ , मैं धारा बन जाऊंगा


तू बन जा यदि पक्षी , मैं डाली बन , सुरताल गाऊंगा


तुझपे तो है हमें इतना ऐतवार ,


पर पिया भूल न जाना प्यार भरा संसार


दे लाख ज़माना सितम , देंगे न कभी हम कोई गम


बन जाएँगे , हम - तुम सनम ।



Friday, April 10, 2009

प्यार तो भी फसाना होता है

प्यार तो भी फसाना होता है
लव खामोश , दिल में अफसाना होता है
रुखसत चैन आँखों की नींद
वो भी याद रुलाना होता है
प्यार तो भी फ़साना होता है
लव खामोश दिल में अफसाना होता है
इतना भी न कह पाना की
ये प्यार और दिल हर पे न आना होता है
लेकिन ये भी तो गुजरा ज़माना होता है
प्यार तो फ़साना होता है
लव खामोश दिल में अफसाना होता है
इस दिल की अवाज कभी- कभी
दीये में जलते लौ की तरह परवाना होता है
पता नहीं था की ऐसा भी खुदगर्ज़ जमाना होता है
प्यार तो भी फ़साना होता है
लव खामोश दिल में अफसाना होता है
पत्थर की बूट की तरह मायूस ये akash
अपने पर मर जाना होता है
कौन जाने खुदा की पयाम भी
खुशी में भी रुलाना होता है
प्यार तो भी फसाना होता है

Thursday, April 9, 2009

जुल्फें ऐसी क्यों बिखरी

जुल्फें ऐसी क्यों बिखरी
शायद हवा ने शरारत की होगी
छिपा होगा इसमे मुखड़ा चाँद का
शायद उसने भी रौशनी ली होगी
ये जुल्फ जब हो चेहरे पर
कुछ सेहरे से लगने लगे , एक तो मदमस्त मौसम
ऊपर से ये नजारा , हम देख कर यों ही बहकने लगे
खुद को परेशां होगा ये पवने किस से हम टकरा गए
ये सावन का मौसम , हम भी बल खा गए
खिलाता चमन है उनका चेहरा
सुर्ख होंठ कजरारे नयना ,
जिसे देख शर्मा गई आइना ,
नयना उनकी है देखने में है इतनी भोली
लगता है सात समुद्र की हमजोली
सच पूछो खुदा का बनाया गया एक साज है
उनकी अपनी एक अलग ही राग है
जुल्फें ऐसी क्यों बिखरी
शायद हवा ने शरारत की होगी
छिपा होगा इसमे मुखड़ा चाँद का
शायद उसने भी रौशनी ली होगी