Sunday, April 19, 2009

क्यों न आबे चैन




क्यों न आबे चैन , बन गया ये प्रीत वाली रैन


धरकन में बस गया तू , जिया ले गया तू


अब न आबे मुझे चैन , निगोरा बीत न पाए ये रैन


क्यों तो मुझसे आँख लडाई , पहले तो थी एक दम परायी


बन न जन तुम हरजाई ।


खाई है जो कसम , साथ निभाना


प्यार का वादा भूल न जाना


पिया वादा तो मरते दम तक है निभाना


लेकिन आप प्यार का वादा भूल न जाना


अब तो एक पल जुदा होकर जी नहीं पाउँगा


कसम जो खायी है तो आपका होकर रहूँगा


प्यार में सारी दुनिया का गम सहूंगा ।


उफ़ तक नहीं करूँगा


तुम पर तो मुझे है यकीं , मोहब्बत से बड़ी कोई नहीं ज़मी


तू बन जायेगी नदियाँ , मैं धारा बन जाऊंगा


तू बन जा यदि पक्षी , मैं डाली बन , सुरताल गाऊंगा


तुझपे तो है हमें इतना ऐतवार ,


पर पिया भूल न जाना प्यार भरा संसार


दे लाख ज़माना सितम , देंगे न कभी हम कोई गम


बन जाएँगे , हम - तुम सनम ।



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