Tuesday, September 15, 2009

मीडिया गेंदा फूल

ओइय-ओइय-ओइय-
मीडिया गेंदा फूल
दोस्त छेड़ देवे
प्रतिद्वंद्वी चुटकी लेवे
मीडिया गेंदा फूल
बड़े बॉस जी गुस्सा होवे
छोटे बॉस समझा लेवे
मीडिया गेंदा फूल
छोड़ सब फिल्ड के अंगना
भावे मीडिया फिल्ड हो
मीडिया गेंदा फूल
ओइय-ओइय-ओइय-
दोस्त छेड़ देवे
प्रतिद्वंद्वी चुटकी लेवे
मीडिया गेंदा फूल
बड़े बॉस जी गुस्सा होवे
छोटे बॉस समझा लेवे
बॉस के सामने है खबरें है न्यारी
चले हैं दुनियादारी
गलतियाँ जब होवे
तब जियरा भारी होवे
मीडिया गेंदा फूल
दोस्त छेड़ देवे
प्रतिद्वंद्वी चुटकी लेवे
मीडिया गेंदा फूल
बड़े बॉस जी गुस्सा होवे
छोटे बॉस समझा लेवे
छोड़ सब फिल्ड के अंगना
भावे मीडिया फिल्ड हो
लाइट, कैमरा और एक्शन
से लैस चले है , जब मीडियामैन
तब बने हैं , वह लोकतंत्र की शान
सबसे अलग है , हमरी शान
ओइय-ओइय-ओइय-
मीडिया गेंदा फूल
दोस्त छेड़ देवे
प्रतिद्वंद्वी चुटकी लेवे
मीडिया गेंदा फूल बड़े
बड़े बॉस जी गुस्सा होवे
छोटे बॉस समझा लेवे
मीडिया गेंदा फूल
नक़लकर्ता - मुकेश कुमार झा

Sunday, April 19, 2009

क्यों न आबे चैन




क्यों न आबे चैन , बन गया ये प्रीत वाली रैन


धरकन में बस गया तू , जिया ले गया तू


अब न आबे मुझे चैन , निगोरा बीत न पाए ये रैन


क्यों तो मुझसे आँख लडाई , पहले तो थी एक दम परायी


बन न जन तुम हरजाई ।


खाई है जो कसम , साथ निभाना


प्यार का वादा भूल न जाना


पिया वादा तो मरते दम तक है निभाना


लेकिन आप प्यार का वादा भूल न जाना


अब तो एक पल जुदा होकर जी नहीं पाउँगा


कसम जो खायी है तो आपका होकर रहूँगा


प्यार में सारी दुनिया का गम सहूंगा ।


उफ़ तक नहीं करूँगा


तुम पर तो मुझे है यकीं , मोहब्बत से बड़ी कोई नहीं ज़मी


तू बन जायेगी नदियाँ , मैं धारा बन जाऊंगा


तू बन जा यदि पक्षी , मैं डाली बन , सुरताल गाऊंगा


तुझपे तो है हमें इतना ऐतवार ,


पर पिया भूल न जाना प्यार भरा संसार


दे लाख ज़माना सितम , देंगे न कभी हम कोई गम


बन जाएँगे , हम - तुम सनम ।



Friday, April 10, 2009

प्यार तो भी फसाना होता है

प्यार तो भी फसाना होता है
लव खामोश , दिल में अफसाना होता है
रुखसत चैन आँखों की नींद
वो भी याद रुलाना होता है
प्यार तो भी फ़साना होता है
लव खामोश दिल में अफसाना होता है
इतना भी न कह पाना की
ये प्यार और दिल हर पे न आना होता है
लेकिन ये भी तो गुजरा ज़माना होता है
प्यार तो फ़साना होता है
लव खामोश दिल में अफसाना होता है
इस दिल की अवाज कभी- कभी
दीये में जलते लौ की तरह परवाना होता है
पता नहीं था की ऐसा भी खुदगर्ज़ जमाना होता है
प्यार तो भी फ़साना होता है
लव खामोश दिल में अफसाना होता है
पत्थर की बूट की तरह मायूस ये akash
अपने पर मर जाना होता है
कौन जाने खुदा की पयाम भी
खुशी में भी रुलाना होता है
प्यार तो भी फसाना होता है