मेरी रुखसत रूह , जरा मेरे यार के करीब कौन आये बता दे
रूह - बरसों की बनी प्यार भरी तस्वीर , अश्क की लकीर नज़र आए
बनी है है वह बुत, कितनों को जंजीर नजर आए
कह न सकी होगी वह लफ्ज , आज उसने मजार पर कह डाली
जो दूरी उसमे और मुझमे थी , आज करीब नजर आए
तुर्बत पर पङी मिटटी क्यों फ़कीर नज़र आए
बस मरहूम याद मेरी , उसको दर्द -ऐ- इरशाद का एह सास जताए
मजार पर जलती ये समां कितनी गंभीर नजर आए
इश्क वह मुझसे करके दूर हो जाए
इतनी शायद उसकी याद हो जो मुझे , उसकी तक़दीर नज़र आए
मन में चलती यादों की वो तीर कितनी ज़मीर नज़र आए
बगल में बैठा शख्श रकीब नज़र आए
मेरी रुखसत रूह मेरे यार के करीब कौन आए
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